2018 में कहीं योजनाओं तो कहीं बयानों से दो-चार होती रही आम लोगों की जिंदगी
भला भारत जैसे कृषिप्रधान देश में ऐसा कौन हो सकता है जिसे किसानों की चिंता न हो और वह भी तब जब किसानों के साथ खेती की बदहाली सदैव चर्चा में रहती है?from Jagran Hindi News - news:national http://bit.ly/2VnRcGj
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