2018 में कहीं योजनाओं तो कहीं बयानों से दो-चार होती रही आम लोगों की जिंदगी

भला भारत जैसे कृषिप्रधान देश में ऐसा कौन हो सकता है जिसे किसानों की चिंता न हो और वह भी तब जब किसानों के साथ खेती की बदहाली सदैव चर्चा में रहती है?

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